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मास पुरा (केले के पत्ते में भुनी मछली)

सरसों के पेस्ट, मिर्च और सरसों के तेल में लिपटी मछली, केले के पत्ते में बांधकर अंगारों पर भुनी। पत्ता खोलते ही धुएंदार, रसीली और भाप उठती हुई।

Ingredients

Method

  1. मछली धो लें और हर टुकड़े या साबुत मछली पर 2 से 3 हल्के चीरे लगाएं।
  2. सरसों का पेस्ट, लहसुन, हल्दी, नमक, 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल और धनिया मिलाएं। इसे मछली पर चीरों के अंदर तक अच्छी तरह मलें। 20 मिनट रखें।
  3. केले के पत्तों को कुछ सेकंड आंच पर जल्दी से घुमाएं, जब तक चमकदार और नरम हो जाएं, ताकि मोड़ने पर फटें नहीं।
  4. मछली पत्ते पर रखें, ऊपर प्याज़, चीरी हरी मिर्च और बचा सरसों का तेल डालें। कसकर पोटली बनाएं और पत्ते की पट्टी या धागे से बांधें। ऊपर से एक और पत्ता लपेट दें।
  5. पोटलियों को लकड़ी या कोयले के गरम अंगारों में 15 से 20 मिनट भूनें, एक-दो बार पलटें। चाहें तो ढके तवे पर धीमी आंच पर हर तरफ 10 से 12 मिनट पका लें।
  6. जब बाहर का पत्ता काला पड़ जाए और जांचने पर मछली आसानी से टूटने लगे, तब पोटली तैयार है।
  7. खाने की जगह पर खोलें और गरम चावल के साथ परोसें; पत्ते में बचा रस चावल पर डाल दें।

Tip: पत्ता दोहरा लपेटें, ताकि बाहर वाला जले और अंदर वाला रस बचाए रखे। बचा हुआ मास पुरा प्याज़ और सरसों के तेल के साथ मसलें तो बढ़िया पिटिका बन जाती है।