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गाहोरी पुरा (अंगारों पर भुना पोर्क)
चर्बी वाले पोर्क पर अदरक, लहसुन, मिर्च और सरसों का तेल मलकर, लकड़ी के अंगारों पर धीरे-धीरे भूनते हैं, जब तक किनारे काले पड़ें और चर्बी धुएं के साथ टपकने लगे।
Ingredients
- 1 किलो छिलके और चर्बी वाला पोर्क (बेली या शोल्डर), 2 इंच के टुकड़ों में कटा
- 2 बड़ा चम्मच अदरक का पेस्ट
- 2 बड़ा चम्मच लहसुन का पेस्ट
- 6 हरी मिर्च, कुटी हुई (या 1 भूत जोलोकिया)
- ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
- 3 बड़ा चम्मच सरसों का तेल
- 1½ छोटा चम्मच नमक
- 4 बांस की सींकें, पानी में भिगोई हुई
- प्याज़ के लच्छे और नींबू के टुकड़े, परोसने के लिए
Method
- पोर्क धो लें, छिलका खुरचकर साफ़ करें और आंच पर बाल जला दें। पोंछकर सुखा लें।
- अदरक, लहसुन, कुटी मिर्च, हल्दी, नमक और सरसों का तेल मिलाएं, और हर टुकड़े पर अच्छी तरह मलें।
- ढककर कम से कम 30 मिनट मैरिनेट करें, या गहरे स्वाद के लिए रात भर फ्रिज में रखें।
- लकड़ी या कोयले की आग जलाएं और उसे दहकते अंगारों तक बुझने दें, ऊंची लपटें न रहें।
- पोर्क को बांस की सींकों में पिरोएं, टुकड़े पास-पास रखें पर ठूंसें नहीं।
- अंगारों से लगभग 6 इंच ऊपर 40 से 50 मिनट भूनें, हर 5 मिनट में पलटें ताकि चर्बी पिघलकर टपके पर जले नहीं।
- बीच में बचा मसाला ऊपर से लगा दें। जब छिलका कुरकुरा हो जाए और अंदर गुलाबीपन न दिखे, तो पोर्क तैयार है।
- सींकों से उतारें और कच्चे प्याज़, नींबू और किसी पिटिका के साथ गरम परोसें।
Tip: टुकड़े चर्बी वाले ही रखें — बिहू की उरुका रात में टपकती चर्बी अंगारों को भड़काती है और गाहोरी पुरा को उसका गहरा धुएंदार स्वाद देती है।